संक्षिप्त उत्तर
जीएसटी बिल फॉर्मेट में क्या-क्या होना चाहिए?
GST टैक्स इनवॉइस (जीएसटी बिल) में CGST नियम 46 के अनुसार ये होने चाहिए: सप्लायर का नाम, पता और GSTIN; 16 अक्षरों तक का लगातार इनवॉइस नंबर; तारीख; खरीदार का नाम, पता और GSTIN (अगर रजिस्टर्ड है); HSN या SAC कोड; विवरण, मात्रा और कर योग्य मूल्य; GST दर और रकम (CGST + SGST या IGST); इंटर-स्टेट सप्लाई में सप्लाई का स्थान; रिवर्स चार्ज की जानकारी; और हस्ताक्षर।
- राज्य के भीतर सप्लाई पर CGST + SGST (आधी-आधी दर), दूसरे राज्य में सप्लाई पर पूरी दर IGST।
- ₹5 करोड़ तक टर्नओवर: B2B इनवॉइस पर 4 अंक का HSN; उससे ज़्यादा: हर इनवॉइस पर 6 अंक।
- 2017-18 से किसी साल ₹5 करोड़ से ज़्यादा टर्नओवर हो तो B2B इनवॉइस पर IRN और QR कोड वाला ई-इनवॉइस ज़रूरी।
- टैक्स न लगने वाली सप्लाई या कंपोज़िशन डीलर के लिए टैक्स इनवॉइस नहीं, बिल ऑफ सप्लाई।
अंतिम समीक्षा: · अन्य भाषाओं में: English
इस पेज पर
- GST टैक्स इनवॉइस क्या है और कब जारी होता है
- इस फॉर्मेट में जीएसटी बिल कैसे बनाएं
- नमूना: भरा हुआ जीएसटी बिल (राज्य के भीतर)
- नियम 46 के अनुसार GST इनवॉइस के फ़ील्ड
- HSN और SAC कोड: कितने अंक लिखें
- CGST + SGST या IGST: कैसे तय करें
- ई-इनवॉइस: IRN और QR कोड
- बिल ऑफ सप्लाई और GST के दूसरे दस्तावेज़
- कितनी कॉपी और कैसे रखें
- गलतियाँ जिनसे खरीदार का ITC अटकता है
- मुख्य शब्द
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
GST टैक्स इनवॉइस क्या है और कब जारी होता है
GST में रजिस्टर्ड व्यक्ति जब टैक्स लगने वाला माल या सेवा बेचता है, तो उसे धारा 31 के तहत टैक्स इनवॉइस जारी करना होता है, और उसका फॉर्मेट CGST नियम 46 तय करता है। बाज़ार में इसे "जीएसटी बिल", "पक्का बिल" या "टैक्स इनवॉइस" कहते हैं। कानून कोई तय डिज़ाइन, रंग या लोगो नहीं माँगता; ज़रूरी यह है कि नियम 46 के सभी लागू विवरण सही-सही छपे हों।
खरीदार के लिए यही इनवॉइस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का आधार है: धारा 16 के तहत ITC तभी मिलता है जब उसके पास टैक्स इनवॉइस हो और सप्लायर ने उसे GSTR-1 में दिखाया हो, ताकि वह खरीदार के GSTR-2B में आए। इसलिए फॉर्मेट की एक छोटी गलती भी ग्राहक का पैसा अटका सकती है।
| सप्लाई | इनवॉइस कब तक |
|---|---|
| माल (goods) | माल हटाने (dispatch) से पहले या उसी समय; जहाँ माल हटाना नहीं होता, वहाँ डिलीवरी या उपलब्ध कराने के समय (धारा 31(1)) |
| सेवा (services) | सेवा की सप्लाई के 30 दिन के भीतर (नियम 47) |
| बैंक, बीमा कंपनी, NBFC की सेवाएँ | सप्लाई के 45 दिन के भीतर |
| लगातार सप्लाई (continuous supply) | हर स्टेटमेंट या भुगतान के समय, जैसा कॉन्ट्रैक्ट में तय हो |
इस फॉर्मेट में जीएसटी बिल कैसे बनाएं
- अपना बिज़नेस जाँचेंकानूनी नाम, पता और GSTIN वैसा ही लिखें जैसा GST रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट पर है। आपका राज्य GSTIN के पहले दो अंकों से तय होता है।
- खरीदार जोड़ेंB2B में खरीदार का GSTIN और राज्य डालें; यही आपके राज्य के साथ मिलकर CGST + SGST या IGST तय करता है। अनरजिस्टर्ड ग्राहक को ₹50,000 या ज़्यादा की सप्लाई पर उसका पता और राज्य लिखें।
- लाइनें भरेंहर लाइन में विवरण, HSN या SAC, मात्रा, यूनिट, दर और GST दर डालें। टैक्स अपने-आप निकलता है।
- नोट्स और शर्तेंसप्लाई का स्थान, रिवर्स चार्ज (हाँ/नहीं), अलग डिलीवरी पता, भुगतान की शर्तें और बैंक विवरण लिखें।
- जारी करेंटोटल जाँचकर साइन इन करें, ताकि इनवॉइस को आपकी सीरीज़ का अगला लगातार नंबर मिले और वह आपकी किताबों और GSTR-1 के डेटा में जाए। PDF डाउनलोड मुफ़्त है (उस पर LuckPanda का छोटा फ़ुटर रहता है); जारी करना, भेजना और बिना LuckPanda ब्रांडिंग वाली PDF पेड Sales मॉड्यूल में है। बिना समझाइश के जल्दी बिल के लिए GST invoice generator इस्तेमाल करें।
नमूना: भरा हुआ जीएसटी बिल (राज्य के भीतर)
अहमदाबाद की Sabarmati Packaging Industries ने सूरत की Tapi Textiles को पैकिंग टेप और स्ट्रेच फ़िल्म बेची। दोनों गुजरात में हैं (GSTIN के पहले दो अंक 24), इसलिए 18% GST आधा-आधा CGST 9% और SGST 9% में बँटता है।
- "टैक्स इनवॉइस" शीर्षक। कंपोज़िशन डीलर या टैक्स-मुक्त सप्लाई के लिए "बिल ऑफ सप्लाई"।
- इनवॉइस नंबर: लगातार, अधिकतम 16 अक्षर, केवल अक्षर, अंक, "-" और "/", वित्त वर्ष में अनोखा।
- जारी करने की तारीख।
- सप्लायर का नाम, पता और GSTIN; पहले दो अंक राज्य कोड हैं।
- प्राप्तकर्ता का नाम, पता और GSTIN (रजिस्टर्ड हो तो)।
- सप्लाई का स्थान राज्य के नाम और कोड के साथ; इंटर-स्टेट सप्लाई में ज़रूरी।
- डिलीवरी पता, जब वह सप्लाई के स्थान से अलग हो।
- HSN/SAC, विवरण, मात्रा और यूनिट (UQC)।
- टैक्स की दर और रकम अलग-अलग: यहाँ CGST और SGST।
- हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर।
आँकड़े: इनवॉइस SPI/26-27/0412 (गुजरात के भीतर)
| विवरण | HSN/SAC | मात्रा | दर | कर योग्य मूल्य | कर |
|---|---|---|---|---|---|
| BOPP पैकिंग टेप 48 mm x 65 m | 3919 | 600 | ₹42.00 | ₹25,200.00 | ₹4,536.00 |
| LLDPE स्ट्रेच फ़िल्म रोल 500 mm | 3920 | 150 | ₹310.00 | ₹46,500.00 | ₹8,370.00 |
| कर योग्य मूल्य | ₹71,700.00 | ||||
| CGST 9% | ₹6,453.00 | ||||
| SGST 9% | ₹6,453.00 | ||||
| कुल | ₹84,606.00 | ||||
कर योग्य मूल्य ₹71,700.00 पर CGST ₹6,453.00 और SGST ₹6,453.00 लगता है; कुल देय ₹84,606.00। Tapi Textiles पूरे ₹12,906.00 का ITC ले सकती है, बशर्ते Sabarmati यह इनवॉइस अक्टूबर 2026 के GSTR-1 में दिखाए।
वही बिल दूसरे राज्य के ग्राहक को
अगर यही माल पुणे (महाराष्ट्र, कोड 27) के ग्राहक को जाए, तो सप्लाई इंटर-स्टेट हो जाती है। कुल टैक्स उतना ही रहता है, पर पूरा IGST 18% लगता है, और इनवॉइस पर "सप्लाई का स्थान: महाराष्ट्र (27)" लिखना ज़रूरी है।
वही लाइनें, गुजरात से महाराष्ट्र (IGST)
| विवरण | HSN/SAC | मात्रा | दर | कर योग्य मूल्य | कर |
|---|---|---|---|---|---|
| BOPP पैकिंग टेप 48 mm x 65 m | 3919 | 600 | ₹42.00 | ₹25,200.00 | ₹4,536.00 |
| LLDPE स्ट्रेच फ़िल्म रोल 500 mm | 3920 | 150 | ₹310.00 | ₹46,500.00 | ₹8,370.00 |
| कर योग्य मूल्य | ₹71,700.00 | ||||
| IGST 18% | ₹12,906.00 | ||||
| कुल | ₹84,606.00 | ||||
नियम 46 के अनुसार GST इनवॉइस के फ़ील्ड
| नियम 46 | फ़ील्ड | क्या लिखें |
|---|---|---|
| (a) | सप्लायर | नाम, पता और GSTIN |
| (b) | इनवॉइस नंबर | लगातार क्रम संख्या, अधिकतम 16 अक्षर; अक्षर, अंक, हाइफ़न "-" और स्लैश "/"; एक या कई सीरीज़; वित्त वर्ष में अनोखा |
| (c) | तारीख | इनवॉइस जारी करने की तारीख |
| (d) | रजिस्टर्ड प्राप्तकर्ता | नाम, पता और GSTIN या UIN |
| (e) | अनरजिस्टर्ड प्राप्तकर्ता, ₹50,000 या ज़्यादा | नाम, पता, डिलीवरी का पता, राज्य का नाम और कोड |
| (f) | अनरजिस्टर्ड प्राप्तकर्ता, ₹50,000 से कम | यही विवरण, अगर ग्राहक माँगे |
| (g) | HSN या SAC कोड | टर्नओवर के हिसाब से 4 या 6 अंक (नीचे देखें) |
| (h) | विवरण | माल या सेवा का साफ़ विवरण |
| (i) | मात्रा और यूनिट | माल के लिए, UQC में: NOS, KGS, MTR, ROL आदि |
| (j) | कुल मूल्य | सप्लाई का कुल मूल्य |
| (k) | कर योग्य मूल्य | छूट (discount) या abatement घटाने के बाद |
| (l) | टैक्स की दर | CGST, SGST/UTGST, IGST और सेस, जो लागू हो |
| (m) | टैक्स की रकम | हर टैक्स अलग-अलग |
| (n) | सप्लाई का स्थान | इंटर-स्टेट सप्लाई में राज्य के नाम के साथ |
| (o) | डिलीवरी का पता | जब वह सप्लाई के स्थान से अलग हो |
| (p) | रिवर्स चार्ज | टैक्स रिवर्स चार्ज पर देय है या नहीं |
| (q) | हस्ताक्षर | सप्लायर या अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर |
| (r) | QR कोड | ई-इनवॉइस में IRN वाला QR कोड |
| (s) | घोषणा | ई-इनवॉइस की सीमा से ऊपर पर छूट वाली संस्था (जैसे बैंक) की घोषणा कि उसे ई-इनवॉइस नहीं बनाना |
इनके अलावा बिल पर बैंक का विवरण, भुगतान की शर्तें, देय तिथि, ब्याज की शर्त और न्यायक्षेत्र लिखना आम है। ये नियम 46 में नहीं हैं, पर उधारी वसूलने में काम आते हैं।
HSN और SAC कोड: कितने अंक लिखें
माल के लिए HSN (Harmonised System of Nomenclature) और सेवाओं के लिए SAC (Services Accounting Code) लिखा जाता है। कितने अंक लिखने हैं, यह पिछले वित्त वर्ष के कुल टर्नओवर (AATO) पर निर्भर है (अधिसूचना 78/2020-केंद्रीय कर, 1 अप्रैल 2021 से):
| पिछले वर्ष का कुल टर्नओवर | B2B इनवॉइस | B2C इनवॉइस (अनरजिस्टर्ड ग्राहक) |
|---|---|---|
| ₹5 करोड़ तक | कम से कम 4 अंक | HSN लिखना वैकल्पिक |
| ₹5 करोड़ से ज़्यादा | कम से कम 6 अंक | कम से कम 6 अंक |
उदाहरण: पैकिंग टेप 4 अंक में 3919 है और 6 अंक में 391910। ई-वे बिल और GSTR-1 की टेबल 12 में भी अब HSN ड्रॉप-डाउन से चुना जाता है, इसलिए इनवॉइस, ई-वे बिल और रिटर्न में एक ही कोड रखें।
CGST + SGST या IGST: कैसे तय करें
सप्लायर के राज्य की तुलना सप्लाई के स्थान (place of supply) से करें। दोनों एक हों तो दर आधी-आधी CGST और SGST में बँटती है (विधानसभा-रहित केंद्रशासित प्रदेश में SGST की जगह UTGST)। अलग हों तो पूरी दर IGST होती है। माल में सप्लाई का स्थान आम तौर पर वह जगह है जहाँ माल की डिलीवरी खत्म होती है; ज़्यादातर B2B सेवाओं में यह रजिस्टर्ड खरीदार का स्थान है।
| स्थिति | टैक्स | उदाहरण: 18% पर ₹1,00,000.00 |
|---|---|---|
| राज्य के भीतर (इंट्रा-स्टेट) | CGST 9% + SGST 9% | ₹9,000.00 + ₹9,000.00 |
| दूसरे राज्य में (इंटर-स्टेट) | IGST 18% | ₹18,000.00 |
| SEZ यूनिट या डेवलपर को | IGST (LUT/बॉन्ड पर शून्य दर) | राज्य वही हो तब भी IGST |
| निर्यात (export) | IGST या LUT पर बिना टैक्स | इनवॉइस पर LUT का हवाला |
| होटल में ठहरना | संपत्ति वाले राज्य का CGST + SGST | ग्राहक का GSTIN किसी भी राज्य का हो |
22 सितंबर 2025 से लागू GST दरों के सुधार के बाद ज़्यादातर माल और सेवाओं पर मुख्य दरें 5% और 18% हैं, और कुछ चुनी हुई वस्तुओं पर 40%। इनवॉइस पर वही दर लिखें जो सप्लाई की तारीख पर उस HSN पर लागू है।
ई-इनवॉइस: IRN और QR कोड
जिन बिज़नेस का कुल टर्नओवर 2017-18 से किसी भी वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ से ज़्यादा रहा है (1 अगस्त 2023 से), उन्हें B2B इनवॉइस, निर्यात इनवॉइस और B2B क्रेडिट/डेबिट नोट को इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल (IRP) पर रिपोर्ट करना होता है। IRP हर दस्तावेज़ को एक IRN (Invoice Reference Number) और साइन किया हुआ QR कोड देता है, जो इनवॉइस पर छपता है (नियम 46(r))। IRN के बिना ऐसा B2B इनवॉइस मान्य नहीं माना जाता।
- B2C इनवॉइस पर IRN नहीं लगता। ₹500 करोड़ से ज़्यादा टर्नओवर वालों को B2C इनवॉइस पर डायनामिक QR कोड छापना होता है।
- 30 दिन की सीमा: 1 अप्रैल 2025 से ₹10 करोड़ या उससे ज़्यादा टर्नओवर वाले बिज़नेस 30 दिन से पुराने इनवॉइस, क्रेडिट नोट या डेबिट नोट IRP पर रिपोर्ट नहीं कर सकते।
- बैंक, बीमा कंपनी, GTA जैसी छूट वाली संस्थाएँ टर्नओवर सीमा से ऊपर हों तो इनवॉइस पर नियम 46(s) की घोषणा लिखती हैं कि उन्हें ई-इनवॉइस नहीं बनाना।
- ई-इनवॉइस का मतलब नया फॉर्मेट नहीं है: इनवॉइस आप अपने सॉफ़्टवेयर में नियम 46 के हिसाब से ही बनाते हैं, फिर उसका डेटा IRP पर भेजते हैं।
बिल ऑफ सप्लाई और GST के दूसरे दस्तावेज़
जब GST लगाया ही नहीं जा सकता, तो टैक्स इनवॉइस की जगह बिल ऑफ सप्लाई (नियम 49) जारी होता है: टैक्स-मुक्त (exempt) माल या सेवा बेचने पर, या जब आप कंपोज़िशन स्कीम में हैं। इसमें नियम 46 जैसे विवरण होते हैं, बस टैक्स की दर और रकम नहीं। कंपोज़िशन डीलर को बिल ऑफ सप्लाई के ऊपर लिखना होता है: "composition taxable person, not eligible to collect tax on supplies"।
| दस्तावेज़ | कब | नियम |
|---|---|---|
| टैक्स इनवॉइस | टैक्स लगने वाली सप्लाई | नियम 46 |
| बिल ऑफ सप्लाई | टैक्स-मुक्त सप्लाई, कंपोज़िशन डीलर | नियम 49 |
| रसीद वाउचर (receipt voucher) | सप्लाई से पहले एडवांस मिलने पर | नियम 50 |
| रिफंड वाउचर | एडवांस लिया, पर सप्लाई नहीं हुई और पैसा लौटाया | नियम 51 |
| पेमेंट वाउचर | रिवर्स चार्ज पर अनरजिस्टर्ड सप्लायर को भुगतान | नियम 52 |
| क्रेडिट नोट / डेबिट नोट | जारी इनवॉइस की रकम घटाना या बढ़ाना | धारा 34, नियम 53 |
| डिलीवरी चालान | बिना बिक्री के माल भेजना: जॉब वर्क, अप्रूवल पर, बिना तय मात्रा के | नियम 55 |
एक ही ग्राहक को टैक्स वाली और टैक्स-मुक्त दोनों चीज़ें बेचें तो एक ही "इनवॉइस-कम-बिल ऑफ सप्लाई" बनाया जा सकता है। और अनरजिस्टर्ड ग्राहक को ₹200 से कम की सप्लाई पर, अगर ग्राहक इनवॉइस न माँगे, तो दिन के अंत में ऐसी सभी बिक्री का एक सामूहिक इनवॉइस काफ़ी है।
कितनी कॉपी और कैसे रखें
| सप्लाई | कॉपी | किसके लिए |
|---|---|---|
| माल | तीन | मूल (ORIGINAL FOR RECIPIENT) खरीदार के लिए, दूसरी (DUPLICATE FOR TRANSPORTER) ट्रांसपोर्टर के लिए, तीसरी (TRIPLICATE FOR SUPPLIER) सप्लायर के लिए |
| सेवा | दो | मूल प्राप्तकर्ता के लिए, दूसरी (DUPLICATE FOR SUPPLIER) सप्लायर के लिए |
ई-इनवॉइस वाले बिज़नेस में माल ले जाने वाला व्यक्ति कागज़ी इनवॉइस की जगह IRN वाला QR कोड इलेक्ट्रॉनिक रूप में दिखा सकता है (नियम 138A)। GST रिकॉर्ड (इनवॉइस समेत) उस वर्ष के वार्षिक रिटर्न की नियत तारीख से 72 महीने तक रखने होते हैं (धारा 36)।
गलतियाँ जिनसे खरीदार का ITC अटकता है
- खरीदार का GSTIN गलत या गायब, जिससे इनवॉइस उसके GSTR-2B में नहीं आता।
- इंट्रा-स्टेट पर IGST, या इंटर-स्टेट पर CGST + SGST।
- इनवॉइस नंबर दोहराना या छोड़ना, या 16 अक्षर से लंबा नंबर।
- टर्नओवर के हिसाब से कम अंकों का HSN, या इनवॉइस और ई-वे बिल में अलग HSN।
- पुरानी GST दर: 22 सितंबर 2025 के बाद की सप्लाई पर नई दर लगाएँ।
- इनवॉइस को GSTR-1 में न दिखाना या देर से दिखाना।
- ई-इनवॉइस के दायरे में होते हुए IRN न लेना, या 30 दिन की सीमा चूकना।
- जारी बिल में बदलाव: गलती सुधारने के लिए क्रेडिट नोट या डेबिट नोट जारी करें, बिल को एडिट न करें।
मुख्य शब्द
- टैक्स इनवॉइस
- टैक्स लगने वाली सप्लाई पर धारा 31 और नियम 46 के तहत जारी GST बिल; खरीदार के ITC का आधार।
- GSTIN
- 15 अक्षर का GST पहचान नंबर; पहले दो अंक राज्य कोड, अगले दस PAN।
- HSN / SAC
- माल (HSN) और सेवाओं (SAC) के वर्गीकरण कोड, जिनसे GST दर तय होती है।
- सप्लाई का स्थान (place of supply)
- वह राज्य जहाँ सप्लाई मानी जाती है; यही तय करता है कि CGST + SGST लगेगा या IGST।
- IRN
- Invoice Reference Number: ई-इनवॉइस रजिस्टर होने पर IRP से मिलने वाली अनोखी पहचान।
- बिल ऑफ सप्लाई
- टैक्स-मुक्त सप्लाई या कंपोज़िशन डीलर का बिल, जिसमें GST नहीं लगता (नियम 49)।
- रिवर्स चार्ज
- वह व्यवस्था जिसमें GST सप्लायर की जगह खरीदार भरता है; इनवॉइस पर लिखना होता है कि यह लागू है या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
HSN कोड कितने अंक का लिखना होता है?
पिछले वर्ष ₹5 करोड़ तक कुल टर्नओवर हो तो B2B इनवॉइस पर कम से कम 4 अंक; B2C पर वैकल्पिक। ₹5 करोड़ से ज़्यादा हो तो हर इनवॉइस पर कम से कम 6 अंक। सेवाओं के SAC कोड पर भी यही नियम है।
इनवॉइस नंबर कितना लंबा हो सकता है?
अधिकतम 16 अक्षर, वित्त वर्ष में अनोखा, जिसमें अक्षर, अंक, हाइफ़न और स्लैश हो सकते हैं। कई बिज़नेस साल का प्रीफ़िक्स लगाते हैं, जैसे INV/26-27/0001। एक से ज़्यादा सीरीज़ रखी जा सकती हैं।
ई-इनवॉइस कब ज़रूरी है?
जब 2017-18 से किसी भी वर्ष कुल टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा रहा हो। तब B2B इनवॉइस IRP पर रजिस्टर करने होते हैं, जो IRN और साइन किया QR कोड देता है। LuckPanda अभी IRN नहीं बनाता।
GST इनवॉइस की कितनी कॉपी चाहिए?
माल के लिए तीन: मूल खरीदार के लिए, दूसरी ट्रांसपोर्टर के लिए, तीसरी सप्लायर के लिए। सेवाओं के लिए दो।
क्या GST बिल पर हस्ताक्षर ज़रूरी है?
हाँ, सप्लायर या अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर। IT Act के तहत इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी इनवॉइस, जैसे ई-इनवॉइस, पर अलग से भौतिक हस्ताक्षर की ज़रूरत नहीं होती।
CGST + SGST कब लगता है और IGST कब?
सप्लायर का राज्य और सप्लाई का स्थान एक हो तो CGST + SGST, हर एक आधी दर। अलग हों, या सप्लाई SEZ को या निर्यात हो, तो पूरी दर IGST।
अनरजिस्टर्ड ग्राहक के बिल में क्या लिखें?
उसका नाम और पता। सप्लाई का कर योग्य मूल्य ₹50,000 या ज़्यादा हो तो डिलीवरी का पता और राज्य का नाम व कोड भी ज़रूरी है; इससे कम पर तभी, जब ग्राहक माँगे।
बिल ऑफ सप्लाई कब जारी करते हैं?
जब GST नहीं लगाया जा सकता: टैक्स-मुक्त सप्लाई पर, या आप कंपोज़िशन स्कीम में हैं। इसका फॉर्मेट नियम 49 में है और इसमें टैक्स की दर और रकम नहीं होती।
सेवा का इनवॉइस कितने दिन में जारी करना होता है?
सेवा की सप्लाई के 30 दिन के भीतर; बैंक, बीमा कंपनी और NBFC के लिए 45 दिन। माल का इनवॉइस माल हटाने से पहले या उसी समय।
क्या GST इनवॉइस हिंदी में बना सकते हैं?
कानून भाषा तय नहीं करता; नियम 46 के सभी विवरण साफ़ होने चाहिए। GSTIN, HSN, नंबर और रकम अंकों में रखें, ताकि खरीदार, ट्रांसपोर्टर और GST पोर्टल का डेटा आपस में मेल खाए।